अध्यात्म की राह पर डॉ. संजीव: सर्वस्व त्याग कर बने ‘श्याम सुंदर गिरी जी महाराज’

ग्राम चंद्रपुरी खादर निवासी और फर्टिलाइजर व्यवसायी डॉ. संजीव कुमार ने सांसारिक जीवन को त्याग कर पूर्ण रूप से वैराग्य का मार्ग चुन लिया है। पिछले कई वर्षों से गौ-सेवा और भक्ति मार्ग में लीन डॉ. संजीव ने चित्रकूट के पूज्य गुरुदेव से दीक्षा लेकर संन्यास धारण किया, जिसके बाद अब उन्हें ‘स्वामी श्याम सुंदर गिरी जी महाराज’ के नाम से जाना जाएगा।

महाराज जी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी फर्टिलाइजर कंपनी, संस्था और गौशाला के सुचारू संचालन के लिए गांव के प्रबुद्ध व्यक्तियों की एक ‘संचालन समिति व ट्रस्ट’ का गठन कर उसे जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि उनके संन्यास के बाद भी जनसेवा के कार्य न रुकें। कानूनी और पारिवारिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पुत्र का उनकी संपत्ति पर वैधानिक अधिकार बना रहेगा, और भविष्य में वह इस ट्रस्ट व समिति में सहभागी बनकर सेवा कार्य कर सकता है, हालांकि वर्तमान में उन्होंने प्रबंधन की कमान समिति को दी है।

गुरु आज्ञा अनुसार महाराज जी अब मौन व्रत, अनिश्चितकालीन पदयात्रा और कठोर तपस्या जैसी कठिन साधनाओं में लीन रहेंगे। 21 मार्च को गांव से अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर निकले महाराज जी का यह निर्णय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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