डायट लोहाघाट में देशभर के शिक्षाविदों के सार्थक संवाद से निकले नए शैक्षिक निष्कर्ष

डायट लोहाघाट में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार “शिक्षा के बदलते परिदृश्य एवं नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता” का समापन सार्थक विमर्श, गहन संवाद और ठोस निष्कर्षों के साथ सम्पन्न हुआ। समापन सत्र में मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी ने इस राष्ट्रीय आयोजन को जनपद और शिक्षा जगत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा ही समाज को सही दिशा देने का सबसे सशक्त माध्यम है। पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के प्रतिनिधि थानाध्यक्ष अशोक कुमार सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी इस तरह के शैक्षिक आयोजनों को सामाजिक चेतना और नैतिक विकास का आधार बताया।

राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन ऑनलाइन व ऑफलाइन हाइब्रिड मोड में किया गया, जिसमें देशभर से 350 से अधिक शोधपत्र प्राप्त हुए। दो दिनों तक चले इस सेमिनार में 100 से अधिक प्रोफेसर, शोधार्थी और शिक्षकों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर शिक्षा के वर्तमान स्वरूप और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया। द्वितीय दिवस के सत्र में प्रभारी प्राचार्य दिनेश सिंह खेतवाल एवं संकाय सदस्यों की अध्यक्षता में प्रख्यात शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियां दीं। समापन अवसर पर सभी शोधपत्र प्रस्तुतकर्ताओं और प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि द्वारा स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्र-छात्राओं और समाज में नैतिक मूल्यों के विकास की मजबूत नींव रखते हैं।

को-कन्वेनर डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने मूल्य आधारित शिक्षा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। वहीं कार्यक्रम संचालक एवं को-कन्वेनर प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने इसे शिक्षा की दिशा और दशा बदलने वाला मील का पत्थर करार दिया। सेमिनार के सफल आयोजन में प्राचार्य मान सिंह, दिनेश सिंह खेतवाल, को-कन्वेनर डॉ. आशुतोष वर्मा, डॉ. अनिल कुमार मिश्रा, डॉ. पारुल शर्मा, दीपक सोराडी, डॉ. अवनीश कुमार शर्मा, कृष्ण सिंह ऐरी, मनोज भाकुनी, नवीन उपाध्याय, डॉ. कमल गहतोड़ी, राम बालक मिश्रा, अखिलेश श्रीवास्तव, डॉ. नवीन जोशी सहित समस्त स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा।

 

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