‘सरकार जनता के द्वार’ शिविर में उमड़ा जनसैलाब, डीएम के न आने से दिखी मायूसी

नेपाल सीमा से सटे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र रौसाल में जिला प्रशासन द्वारा ‘सरकार जनता के द्वार’ कार्यक्रम के तहत एक वृहद जनकल्याणकारी शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में सीमावर्ती व दुर्गम क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ उठाया। शिविर की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जीएस खाती ने की। जिले के करीब दो दर्जन विभागों ने शिविर में स्टॉल लगाकर अपनी सेवाएं दीं। चिकित्सा विभाग की ओर से एलोपैथिक, आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जबकि अन्य विभागों ने प्रमाण पत्रों का वितरण, मौके पर दस्तावेज निर्माण और योजनाओं की जानकारी दी। शिविर से लगभग 560 लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जीएस खाती ने मौके पर ही कई जनसमस्याओं का निस्तारण किया और अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

हालांकि शिविर में पहुंचे कई लोग “क्विक एक्शन” के लिए पहचान बना चुके जिलाधिकारी मनीष कुमार की उपस्थिति की उम्मीद लेकर आए थे। डीएम के न पहुंचने की जानकारी मिलते ही लोगों में मायूसी भी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना था कि पूर्व में डीएम के जनता दरबार में उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हुआ है, इसलिए वे इस शिविर में भी उनसे मिलने की आस लगाए बैठे थे। इसी क्रम में रौसाल क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा खुलकर रखी। उनका कहना था कि एक वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के बावजूद खालगड़ा–रौसाल मोटर मार्ग पर अब तक हॉटमिक्स कार्य नहीं हो पाया है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण क्षेत्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि आज जिलाधिकारी मनीष कुमार शिविर में उपस्थित होते, तो संभवतः इस महत्वपूर्ण सड़क समस्या का समाधान निकल सकता था। कार्यक्रम में कृषि, उद्यान, सहकारिता, पंचायती राज, जिला पूर्ति, जिला उद्योग, पशुपालन, डेरी विकास सहित अनेक विभागों के अधिकारियों ने स्टॉल लगाकर लोगों को विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। शिविर के सफल संचालन में भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सतीश चंद्र पांडे, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्कर बोरा, सुभाष बगोली सहित बड़ी संख्या में ग्राम प्रधानों की सक्रिय भागीदारी रही। शिविर के दौरान रौसाल गांव से आए बच्चों ने युवा कल्याण अधिकारी से क्रिकेट किट की मांग की, लेकिन उपलब्ध न होने से बच्चे निराश हो गए। बच्चों की भावनाओं को समझते हुए सतीश चंद्र पांडे ने अपनी ओर से क्रिकेट किट देने की घोषणा कर बच्चों की निराशा को खुशी में बदल दिया। इस अवसर पर बीडीओ केएस रावत ने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया।

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