दरी पर बैठकर सुनते रहे जनप्रतिनिधियों की पीड़ा, भेदभाव खत्म करने और प्रस्ताव शामिल करने का दिया आश्वासन

ब्लॉक कार्यालय में पिछले तीन दिनों से चल रहा क्षेत्र पंचायत सदस्यों का धरना शुक्रवार को और उग्र हो गया। राज्य व केंद्र वित्त में कथित अनियमितताओं, टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और अपनी कार्य योजनाओं को प्रस्तावों में शामिल न किए जाने के आरोपों के बीच 16 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने ब्लॉक कार्यालय में तालाबंदी कर दी। तालाबंदी और जोरदार नारेबाजी से पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार स्वयं लोेहाघाट ब्लॉक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने धरना स्थल पर दरी में बैठकर क्षेत्र पंचायत सदस्यों की समस्याओं को गंभीरता और धैर्यपूर्वक सुना। सदस्यों ने डीएम को बताया कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है, उनकी कार्य योजनाओं को जानबूझकर प्रस्तावों में नहीं रखा जा रहा और टेंडर प्रणाली में गुपचुप तरीके से टेंडर दिए जा रहे हैं।

जिलाधिकारी ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए खंड विकास अधिकारी लोहाघाट कविंद्र सिंह रावत को स्पष्ट निर्देश दिए कि क्षेत्र पंचायत सदस्यों की कार्य योजनाओं को प्रस्तावों में शामिल किया जाए, किसी भी पंचायत प्रतिनिधि के साथ भेदभाव न हो और शीघ्र क्षेत्र पंचायत सदस्यों की बैठक आयोजित की जाए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधि यहां धरने पर बैठने के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी उठाने के लिए चुने गए हैं। जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने अपना धरना समाप्त कर ब्लॉक कार्यालय में की गई तालाबंदी खोल दी। हालांकि सदस्यों ने साफ चेतावनी दी कि यदि आश्वासन के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, खंड विकास अधिकारी कविंद्र सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र पंचायत सदस्य मौजूद रहे।

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