नशा कुछ पल की मदहोशी, लेकिन जीवनभर की क्षति।

आईटीबीपी 36वीं वाहिनी में ब्रह्मकुमारी बहनों ने हिमवीरों को दिलाई नशामुक्ति की शपथ, डिजिटल अरेस्ट और मोबाइल की लत पर भी किया जागरूक।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की 36वीं वाहिनी में रविवार को आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में ब्रह्मकुमारी संस्था की बहनों ने अधिकारियों और हिमवीरों को नशामुक्ति, डिजिटल अरेस्ट और मोबाइल की बढ़ती लत के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में समाज में तेजी से बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति को गंभीर सामाजिक बीमारी बताते हुए इससे दूर रहने और दूसरों को भी प्रेरित करने का आह्वान किया गया।

ब्रह्मकुमारी बहनों ने कहा कि नशा व्यक्ति को कुछ समय के लिए मदहोश अवश्य कर देता है, लेकिन बाद में वही उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गहरी क्षति पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात वीर जवानों का कर्तव्य केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को भी स्वस्थ दिशा देना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है। जवान स्वयं नशे से दूर रहकर समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान सभी अधिकारियों और हिमवीरों को सामूहिक रूप से नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से बचने के उपायों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि जागरूकता और सतर्कता से ही ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है।

ब्रह्मकुमारी बहनों ने मोबाइल के सकारात्मक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि आज मोबाइल की लत बच्चों और युवाओं सहित समाज के बड़े वर्ग को प्रभावित कर रही है। आवश्यकता इस बात की है कि तकनीक का उपयोग संयम और जागरूकता के साथ किया जाए, ताकि यह सुविधा बने, विनाश का कारण नहीं।

इससे पूर्व वाहिनी के कमांडेंट संजय कुमार ने ब्रह्मकुमारी बहनों का स्वागत करते हुए सामाजिक बुराइयों के खिलाफ उनके जनजागरूकता अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम जवानों के मानसिक और सामाजिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में द्वितीय कमान अधिकारी बेगराज मीणा, खान फहद, गौरव कुमार, एम फ्लिप गंगटे, दिनेश बिष्ट, गोपाल वर्मा सहित बड़ी संख्या में हिमवीर मौजूद रहे।

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