लोकगीतों की तान पर वन संरक्षण का संदेश, मनोरंजन के साथ जंगल बचाने की अनोखी पहल।

गीत–संगीत की मधुर धुनों के बीच अब लोगों को वनों को आग से बचाने की प्रेरणा भी मिल रही है। लोहाघाट वन क्षेत्र के अंतर्गत भीलवाड़ा हिमालय से तौलिया की दिशा में वन विभाग की पहल पर संस्कृत और लोकधुनों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें मनोरंजन के साथ वन संरक्षण का संदेश प्रभावी ढंग से दिया जा रहा है। लोक कलाकार रमेश राम और उनकी टीम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लोकगीतों के जरिए लोगों से वनों के महत्व को समझने और उन्हें आग से बचाने की अपील की जा रही है। कलाकारों ने अपने गीतों में बताया कि वन महिलाओं के लिए मायके के समान होते हैं और वनों से ही मानव जीवन की सुरक्षा और समृद्धि जुड़ी है। जब तक वन सुरक्षित हैं, तब तक मनुष्य का जीवन भी सुरक्षित है।

लोक कलाकारों ने अपने संदेश में कहा कि पेड़ जन्म से लेकर मृत्यु तक हर कदम पर मानव का साथ निभाता है। वह हमें ऑक्सीजन, जल, भोजन और जीवन का आधार देता है, इसलिए उसकी रक्षा करना हम सभी का नैतिक और सामाजिक कर्तव्य है। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को यह भी समझाया जा रहा है कि थोड़ी सी लापरवाही कैसे वनों को आग की भेंट चढ़ा सकती है और इसका दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। इस अनोखी पहल को क्षेत्र में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और ग्रामीणों के साथ-साथ युवाओं में भी वनों को बचाने को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

  • Related Posts

    जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में जिला पूर्ति विभाग द्वारा गैस की कालाबाजारी करने वाले के खिलाफ निरंतर की जा रही है कार्यवाही

    संजू पुरोहित संपादक घरेलू गैस सिलेंडरो में कम गैस पाए जाने पर 02 गैस वाहन चालकों के विरुद्ध किया गया मुकदमा दर्ज जिलाधिकारी के निर्देशन में पूर्ति विभाग द्वारा की…

    रुड़की में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल: ईद पर पुष्प वर्षा, मिठाई बांटकर दी मुबारकबाद, हिंदू-मुस्लिम एकता की दिखी मिसाल

    ईद उल फितर के पावन अवसर पर रुड़की में सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने ईदगाह के समीप स्टॉल लगाकर नमाज अदा कर लौट रहे नमाजियों का…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *