राष्ट्रीय आर्थिक सर्वे 2025–26 में सेतु आयोग की दीर्घकालिक, डाटा आधारित नीतियों को मिली सराहना।

उत्तराखंड के समग्र, दूरदर्शी और सक्षम सोच पर आधारित विकास मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिली है। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025–26 के लिए जारी किए गए राष्ट्रीय आर्थिक सर्वे में यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि सेतु आयोग द्वारा किए जा रहे शोध, नवाचार और नीति निर्माण ने उत्तराखंड के विकास को नई दिशा दी है। ख्यातिप्राप्त विचारक एवं क्राइसिस थिंक टैंक विशेषज्ञ राजशेखर जोशी के नेतृत्व में गठित स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर एंपावरिंग एंड ट्रांसफॉर्मिंग उत्तराखंड (सेतु) ने लंबी अवधि की विकास योजनाओं को डाटा आधारित नीतियों के माध्यम से जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई है। इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उत्तराखंड परिप्रेक्ष्य में सेतु आयोग द्वारा कृषि, बागवानी, शहरी एवं सामाजिक विकास, कौशल विकास, पंचायतों की क्षमता वृद्धि, पशुपालन, आधुनिक ग्रामीण सेवा केंद्र और डेयरी विकास जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न केवल योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ी है, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक संरचना को भी मजबूती मिली है।
सेतु आयोग की एक बड़ी उपलब्धि यह भी है कि इसके उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी का टाटा, बिरला जैसे प्रमुख औद्योगिक समूहों तथा आईआईटी रुड़की सहित देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पिछले तीन दशकों से गहरा जुड़ाव रहा है। उनके व्यापक अनुभव और कॉर्पोरेट व शैक्षणिक सहभागिता के चलते उत्तराखंड के युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। राजशेखर जोशी द्वारा निरंतर चिंतन, संवाद और सहभागिता के माध्यम से उत्तराखंड को नई दिशा और दशा देने का प्रयास किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के विकास की मजबूत नींव साबित हो सकता है।

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