“अब मेयर नहीं, सब हो गए पैदल।”

उत्तराखंड के 11 नगर निगमों में मेयर और पार्षद सिर्फ दिखावे भर रह गए हैं। सारे वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार एमएनए (मुख्य नगर अधिकारी) के पास हैं। न मेयर को किसी प्रकार की नियुक्ति का अधिकार है, न ही कोई वित्तीय स्वीकृति का। पार्षदों की स्थिति तो और भी खराब है — उनके पास तो कोई अधिकार ही नहीं।

कई मेयरों ने चुनाव जीतने के लिए करोड़ों खर्च किए, पार्षदों ने भी लाखों लगाए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद भी हकीकत में उनके पास कोई शक्ति नहीं। मेयरों को सिर्फ “मेयर” लिखी गाड़ी मिली है, बाकी अधिकारों के नाम पर सब शून्य है।

“हम तो केवल उद्घाटन और समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए हैं,” – एक मेयर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।

 

देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल का कहना है कि वे जनता की सेवा के इरादे से आए हैं, लेकिन अधिकार एमएनए के पास ही हैं। वो चाहें तो काम करें, न चाहें तो रोक दें – मेयर कुछ नहीं कर सकता।

कुछ पार्षदों ने यहां तक सवाल उठाया है:

“जब सभी अधिकार एमएनए को ही देने थे, तो चुनाव की ये नौटंकी क्यों?”

 

साफ है, राज्य सरकार ने मेयरों और पार्षदों को सिर्फ एक प्रतीक बना छोड़ा है, जबकि असली सत्ता नगर निगमों में बैठे एमएनए के पास है।

  • Related Posts

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के बारह वर्ष पूरे होने पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया देश की बड़ी उपलब्धि

    जिला भाजपा कार्यालय रूड़की पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा,जनसेवा,जनकल्याण एवं सुशासन के गौरवपूर्ण बारह साल पूर्ण होने पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा,रूड़की द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया,जिसमें…

    बॉलीवुड सिंगर शबाब साबरी ने साबिर पाक की दरगाह में हाजिरी दे मांगी अमनो-सलामती की दुआएं

    बॉलीवुड (मुंबई) के सिंगर तथा दर्जन भर से अधिक फिल्मों में अपने सुरों और संगीत का जादू जगाने वाले शबाब साबरी ने विगत रात्री हजरत मखदूम साबिर कलियरी की दरगाह…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *