नगर निगम में आयुक्त के पद पर रहे आईएएस वरुण चौधरी के कार्यकाल में सराय स्थित 33 बीघा जमीन को 58 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। हालांकि डंपिग ग्राउंड के पास स्थित इस भूमि की मार्केट वैल्यू मात्र 10 करोड़ है। सर्किल रेट का फायदा उठाकर अफसरों ने करोड़ों का खेल कर दिया। चिंगारी ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। जिस पर तत्कालीन नगर आयुक्त वरूण चौधरी ने चिंगारी व एक अन्य पत्रकार को कानूनी नोटिस देने और एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी थी, लेकिन चिंगारी दबाव में नहीं आया।
चौधरी साहब चाहते थे कि चिंगारी खबर का खंडन छापे, लेकिन चूंकि चिंगारी के पास सभी दस्तावेजी सबूत थे, इसलिये खंडन नहीं छापा गया। वैसे भी चिंगारी अपनी खबरों का खंडन नहीं छापता, क्योंकि सभी ख़बरें तथ्यों की पुष्टि के बाद प्रकाशित की जाती हैं। बहरहाल चिंगारी व अन्य अख़बारों तथा चैनलों की ख़बरों का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की जांच वरिष्ठ आईएएस
अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को सौंपी। जांच रिपोर्ट में वरुण चौधरी के साथ-साथ जिलाधिकारी एवं तत्कालीन प्रशासक कर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन एसडीएम अजयवीर व नगर निगम के अन्य अधिकारी व कर्मचारी लपेटे में आ गये। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिना देर किये सभी आरोपियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया तथा मामले की उच्च स्तरीय जांच सौंपी है। इस मामले में जहां अफसरों द्वारा किये गये भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है, वहां मुख्यमंत्री द्वारा की गई सख्त कार्रवाई को लेकर उनकी छवि में चार चांद लगे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई के बाद अनेक अफसरों, नेताओं, वरिष्ठ पत्रकारों व गणमान्य लोगों ने चिंगारी को बधाई दी है।






