विवेकानंद जी कहते थे यदि देश को मिल जाएं 100 तेजस्वी और ओजस्वी युवा, तो बदल सकती है भारत की तस्वीर – सिविल जज भवदीप सिंह रावते

संजू पूरोहित संपादक

मायावती आश्रम में स्वामी विवेकानंद जयंती पर विधिक साक्षरता शिविर, युवाओं में राष्ट्रीय चरित्र और अनुशासन पर दिया गया जोर।

चम्पावत। स्वामी विवेकानंद जी का कथन था यदि देश को तेजस्वी, ओजस्वी और सकारात्मक सोच वाले मात्र 100 युवा भी मिल जाएं, तो वे देश की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं। युवाओं में ऐसी अपार ऊर्जा और सामर्थ्य होती है, जैसी पहाड़ों से निकलने वाली नदी की तेज धारा, जो किसी से यह नहीं पूछती कि समुद्र कहां है, बल्कि स्वयं अपना मार्ग तय कर आगे बढ़ती है। यह विचार सिविल जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव भवदीप सिंह रावते ने अद्वैत आश्रम, मायावती में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि युवा देश की अमूल्य धरोहर हैं। उन्हें सही दिशा और दशा देने के साथ-साथ उनके भीतर राष्ट्रीय चरित्र निर्माण और अनुशासन की भावना जागृत करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को मनाई जाती है, जबकि मायावती में हिंदू पंचांग के अनुसार आज यह आयोजन किया गया। मा॰ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा-निर्देशन में 5 से 12 जनवरी तक मनाए जा रहे युवा सप्ताह को मुख्यमंत्री की परिकल्पना वाले मॉडल जिले में पूर्ण रूप से युवाओं को समर्पित किया गया है। सिविल जज ने समाज में बढ़ते नशे और मोबाइल की लत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज एक ऐसा सामाजिक संकट पैदा हो गया है, जिसमें समाज के ही कुछ लोग थोड़े से स्वार्थ के लिए युवाओं को नशे के दलदल में धकेलकर उनका भविष्य बर्बाद कर रहे हैं, जो आगे चलकर राष्ट्र के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज और परिवारों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसे समाजविरोधी तत्वों की पहचान करें। युवाओं का भविष्य खराब करने वाला व्यक्ति कभी हमारा अपना नहीं हो सकता।

उन्होंने युवाओं से नशे और मोबाइल की विकृतियों से दूर रहने की अपील की और समाज के हर वर्ग से इस दिशा में आगे आने का आह्वान किया। साथ ही कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आश्रम प्रबंधक के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आश्रम प्रबंधक स्वामी सुहृदानंद ने कहा कि बचपन से ही अच्छे आचार, विचार और संस्कार देने से ही एक योग्य नागरिक का निर्माण संभव है। स्वामी विवेकानंद के विचारों और साहित्य को यदि जीवन में अंगीकार कर लिया जाए, तो युवा हजारों वर्षों तक भी अपने मार्ग से भटक नहीं सकते।कार्यक्रम का संचालन डीजीसी भास्कर मुरारी ने किया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्र नवीन पंत, बृजेश जोशी, मुन्नी बोरा, प्रियंका जोशी, कमल राम, रमेश चंद्र, शीला तड़ागी, ताराचंद, विनोद मेहरा, रेनु गड़कोटी, भवान सिंह फर्त्याल सहित अनेक गणमान्य लोग एवं युवा उपस्थित रहे और अपने विचार रखे।

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