जुकाम है, क़फ़ है, सूखी खाँसी है, गले में किचकिच है, पसलियों में दर्द होता है खाँसते समय!

जुकाम या नजला जिसे मेडिकल में कॉमन कोल्ड कहते हैं।

पर यहाँ भी विरोधाभास है – कि ये रोग न तो किसी कीटाणु के कारण कॉमन है, मतलब ऐसा कोई विशेष सर्वव्यापी कीटाणु नहीं है जिससे ये रोग होता हो।

दूसरी बात कोल्ड विरोधाभास की। यह कोल्ड यानी ठण्ड से भी सम्बन्धित नहीं है। इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि सर्दियों में ज़ुकाम की आशंका अधिक होती हो या उसके लक्षण बढ़ जाते हों।

किसी कॉमन कीटाणु की बजाय यह रोग दो-सौ विषाणुओं से होता है। सबकी अलग-अलग संरचना, सबका शरीर में अलग-अलग ढंग से रोग पैदा करना। उन लक्षणों को किसी रोगी में देखा और कह दिया कि आपको तो बड़ा तेज़ ज़ुकाम है।

लक्षणों का एक-जैसा होना, एक ही कारण से होना हमेशा नहीं होता। नाम चाहे इस रोग का ज़ुकाम, नज़ला, कॉमन कोल्ड हो, यह विषाणु के स्तर पर एक रोग है ही नहीं। ऐसे में ढेरों कारणों के कारण पैदा होना वाले इस ढीले वाले नाम वाले रोग-समूह को कैसे ठीक किया जाए?

ज़ुकाम फ़िलहाल होते रहेंगे। वयस्कों में साल में दो-चार बार और बच्चों में दस बार तक। जुकाम कीटाणु से नहीं, विषाणु से होता है। इसलिए बिना सोचे समझे गूगल करके ड्रग वगैरह नहीं लेनी चाहिए।

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