हरिद्वार जनपद की तहसील में कार्यरत पटवारी हो या पटवारी से लेकर ऊपर तक बैठे नायब व तहसीलदार सब की अपनी-अपनी दुकान सजी हुई है ।आप आए और उनको लिफाफा हैसियत के हिसाब से पकड़ा कर , अपना काम करा कर ले जाएं लेकिन कभी-कभी दिक्कत यहां आ जाती है की आम जनता को लिफाफा लेने के बाद भी यह अधिकारी बेहद परेशान करते हैं और महीनों टहलाते रहते हैं जिससे दुखी होकर काम कराने वाले इनकी शिकायत लेकर विजिलेंस तक पहुंच जाते हैं और विजिलेंस टीम अपना जाल बिछाकर इनको दबोच भी लेती है लेकिन सच्चाई यह है कि पैसे लेते हुए पकड़े जाओ और पैसे देकर छूट जाओ यह हमारे देश की परंपरा है।

और यह लोग पैसे लेकर पकड़े जाने के बावजूद पैसे देकर छूटकर फिर अपने धंधे में लग जाते हैं अधिकांश पटवारीयो ने अपने पास रिश्वत लेने के लिए कर्मचारी रखे हुए हैं यह कर्मचारी ही उनके नाम की रिश्वत पकड़ते हैं कभी-कभी विजिलेंस टीम इन पटवारीयो के इन कर्मचारियों को ही पकड़ लेती है अभी पिछले दिनों ही एक महिला पटवारी के कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया लेकिन महिला पटवारी का कुछ नहीं बिगड़ा बेचारा गरीब कर्मचारियों मारा गया ।

हाल यह है की जो पटवारी जिस हल्के में पहुंच जाते हैं वहां से हटने का नाम नहीं लेते हैं क्योंकि उन इलाकों में इन पटवारीयो का रिश्वतखोरी का धंधा चलने के साथ ही प्रॉपर्टी डीलिंग का कारोबार भी खुलकर चलता है कुछ पटवारी तो जमीन को इधर से उधर करने जिंदे को मरा दिखाने और न जाने क्या-क्या करने के नाम पर लाखों रुपए ले लेते हैं इन पटवारीयो की अगर हैसियत देखी जाए तो मात्र मामूली सैलरी पाने वाले यह पटवारी बड़ी-बड़ी गाड़ियों व बढ़िया मकान के साथ ही अच्छे खासे बैंक बैलेंस के स्वामी है ।
लेकिन अब इन पटवारी ने विजिलेंस टीम से बचने के लिए अपने यहां कर्मचारी रख लिए हैं इन कर्मचारियों को पटवारी 10 से 15000 रुपए महीना देते हैं और उनसे पूरा कार्य लिया जाता है किसके यहां से कागज लाने हैं किसके यहां से मोटा लिफाफा लाना है किसके यहां कागज पहुचाने है यह सारा कार्य पटवारी का निजी कर्मचारी करता है पटवारी की हैसियत इतनी है कि वह एसडीएम तक के यहां का ठेका ले लेता है एसडीएम स्तर तक के काम पटवारियों द्वारा करा कर पार्टी को सौंप दिए जाते हैं इसकी आवाज में लिफाफे का वजन थोड़ा भारी हो जाता है।






