प्रस्तावों की अनदेखी और फंड की जानकारी न देने का आरोप, डीएम तक जाने की चेतावनी।
लोहाघाट। ब्लॉक में सत्ता संतुलन बेहद मामूली अंतर से तय होने के बाद से चल रहा राजनीतिक टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने अपने साथ खुले भेदभाव का आरोप लगाते हुए आज से ब्लॉक कार्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि लोहाघाट क्षेत्र पंचायत में कुल 34 सदस्य हैं। चुनाव के दौरान वर्तमान ब्लॉक प्रमुख को 18 जबकि उनके प्रतिद्वंदी को 16 मत मिले थे। तभी से ब्लॉक में दो धड़ों के बीच खींचतान लगातार गहराती जा रही है, जिसका खामियाजा अब विरोधी खेमे के क्षेत्र पंचायत सदस्यों को भुगतना पड़ रहा है।
धरने पर बैठे क्षेत्र पंचायत सदस्यों का आरोप है कि उनके द्वारा दिए गए किसी भी विकास प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। न तो विकास कार्यों की जानकारी साझा की जा रही है और न ही चतुर्थ राज्य वित्त, 15वां वित्त आयोग अथवा केंद्रीय वित्त से मिलने वाली धनराशि के उपयोग का कोई ब्योरा सदस्यों को दिया जा रहा है। इस संबंध में पहले ही खंड विकास अधिकारी वीडियो केएस रावत को ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन उसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। सदस्यों का कहना है कि जानबूझकर उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है, जो जनप्रतिनिधियों की गरिमा के खिलाफ है।
धरने में शामिल क्षेत्र पंचायत सदस्य बबीता, रिचा मेहरा, नीमा धामी, उमा कुंवर, जयंती गोस्वामी, शोभन सिंह, अंकित बोहरा, अमित कुमार समेत अन्य सदस्यों ने साफ शब्दों में कहा कि नई क्षेत्र पंचायत के गठन के बाद अब तक कहां-कहां और किन मदों में धनराशि खर्च की गई, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि उनके द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर क्या कार्रवाई हुई।
सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पारदर्शिता नहीं बरती गई तो वे जिलाधिकारी की चौखट पर पहुंचकर अपना आक्रोश दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही उन्होंने ब्लॉक द्वारा संचालित प्रत्येक कार्य को अनिवार्य रूप से टेंडर प्रक्रिया से कराए जाने की मांग भी उठाई है। दिनभर चले धरने और नारेबाजी से ब्लॉक कार्यालय परिषद राजनीतिक अखाड़े में तब्दील नजर आया। यह विरोध न सिर्फ प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि लोहाघाट ब्लॉक में आंतरिक सत्ता संघर्ष की गहराती खाई को भी उजागर करता है।






