भवन के हिस्से पहले भी गिर चुके हैं, OPD पर भी मंडरा रहा खतरा

राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल भवन का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया है। हालांकि, जो हिस्सा गिरा है। उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा था, लेकिन इस हिस्से के गिरने से अब अस्पताल भवन पर खतरा बढ़ गया है। पूरा भवन ही जर्जर हो चुका है। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। पुरानी तहसील में पुलिस चौकी के बराबर में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल है। अस्पताल का भवन ब्रिटिशकाल का बना हुआ है। भवन बेहद पुराना होने की वजह से जर्जर हो चुका है। जर्जर भवन के कारण कुछ ही हिस्से में अब अस्पताल संचालित हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से लगातार अस्पताल के नए भवन की मांग की जा रही है। भवन के जर्जर होने की वजह से अस्पताल के आवासीय भवन गिर चुके है। अस्पताल भवन पार्क वाली साइड एक बड़ा हिस्सा और गिर गया है।

हालांकि, इस हिस्से में अस्पताल संचालित नहीं था। जिसके कारण कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। इससे पहले पुलिस चौकी की ओर वाला एक हिस्सा गिर गया था। अस्पताल भवन के हिस्से भरभराकर गिर रहे है। जिससे अब अस्पताल भवन के उस हिस्से पर भी खतरा मंडरा रहा है। जिसमें अस्पताल की ओपीडी, डिस्पेंसरी और वार्ड आदि संचालित है। पूरा भवन बारिश में टपकता है। अस्पताल स्टाफ की ओर से लगातार नए भवन की मांग की जा रही है। अस्पताल के आसपास निवास करने वाले सुधीर कुमार, राकेश कुमार, दिलीप, रोशन आदि का कहना है कि अस्पताल का भवन बेहद जर्जर हो चुका है। कभी यह भवन भरभराकर गिर सकता है। जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। जिम्मेदार इस पर ध्यान नहीं दे रहे है। अस्पताल के जर्जर होने की वजह से यहां मरीज भी कम ही आते हैं।

अस्पताल भवन का जो हिस्सा गिरा है। वह अस्पताल के इस्तेमाल में नहीं था। अस्पताल अभी रुड़की अस्पताल के नाम पर दर्ज है। आयुर्वेदिक अस्पताल के नाम पर भवन को दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। आयुर्वेदिक अस्पताल के नाम पर भवन दर्ज होने पर निदेशालय की ओर से नए भवन के लिए बजट जारी कर दिया जाएगा। विधायक प्रदीप बत्रा ने भी अस्पताल के इस भवन को आयुर्वेदिक अस्पताल के नाम पर दर्ज कराए जाने के लिए नगर निगम में प्रस्ताव दिया था।  – डॉ. प्रदीप कुमार, प्रभारी, राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल, रुड़की।

जिस भवन में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित है। वह भवन रुड़की सिविल अस्पतताल के नाम पर दर्ज है। आयुर्वेदिक अस्पताल की ओर से भवन को नाम कराए जाने के लिए पत्र दिया गया था। शासन स्तर से ही यह कार्य हो सकता है। आयुर्वेदिक अस्पताल की ओर से जो पत्र दिया गया है। उसे शासन को भेज दिया गया है। शासन स्तर से ही इस पर निर्णय लिया जाना है।    – डॉ. एके मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, सिविल अस्पताल रुड़की।

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