प्रणव पण्ड्या व शैलदीदी ने माताजी के जीवन को बताया नारी सशक्तिकरण का प्रतीक

गायत्री परिवार की संस्थापिका व नारी जागरण की प्रेरणास्त्रोत वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी की 31वीं पुण्यतिथि पर रविवार को शांतिकुंज सहित देश-विदेश के प्रज्ञा संस्थानों में विविध कार्यक्रमों का आयोजन भव्यता एवं श्रद्धा के साथ किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का शांतिकुंज आगमन होता रहा और दिनभर श्रद्धांजलि सभाओं, प्रार्थनाओं व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का क्रम चलता रहा। पुण्यतिथि को ‘महालयारंभ’ के रूप में मनाया गया।

सायंकालीन सांस्कृतिक संध्या में शांतिकुंज और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की बहिनों ने भजन, गीत, लघु नाटिका और बांसुरी, तबला, सितार जैसे प्राचीन वाद्ययंत्रों की मनोहारी प्रस्तुतियाँ देकर माताजी के विचारों को जीवंत कर दिया। प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और पूरा वातावरण माताजी की स्मृतियों से सराबोर हो गया।

इस अवसर पर महिला जागरण रैली का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों बहिनों ने “नारी जागरण” और “संस्कृति का उत्थान” जैसे नारों के साथ नगर भ्रमण किया। रैली शांतिकुंज से प्रारंभ होकर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर से होती हुई पुनः शांतिकुंज में संपन्न हुई। रैली में बहिनों का उत्साह देखते ही बनता था। वहीं भाइयों की टीम ने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हुए आयोजन को सफल बनाया।

अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या और श्रद्धेया शैलदीदी ने अपने संदेश में कहा कि माताजी का जीवन मूल्य, त्याग और नारी उत्थान के प्रति समर्पण आज भी हम सभी के लिए पथप्रदर्शक है। माताजी का यह प्रेरक वाक्य—“मेरे पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति बेटा-बेटी समान है, मेरा घर सबका मायका है”—आज भी गायत्री परिवार के परिजनों को मार्गदर्शन देता है। उन्होंने कहा कि माताजी ने जिस 21वीं सदी को नारी सदी बताया था, उसकी झलक आज समाज में स्पष्ट दिखाई दे रही है।

पुण्यतिथि कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित जनसमुदाय ने माताजी के दिखाए मार्ग पर चलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। सायंकालीन सभा में बहिनों के संचालन में गायत्री दीपमहायज्ञ का आयोजन हुआ, जिसने पूरे वातावरण को दिव्यता और श्रद्धा से परिपूर्ण कर दिया।

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