डॉ०) अरुण कुमार त्रिपाठी को Fellow Of Rashtriya Ayurveda Vidyapeeth (FRAV) उपाधि से सम्मानित किया

हरिद्वार ।”राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ नई दिल्ली द्वारा आयुष शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ठ कार्यो हेतु उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ०) अरुण कुमार त्रिपाठी को Fellow Of Rashtriya Ayurveda Vidyapeeth (FRAV) उपाधि से सम्मानित किया गया”।

नई दिल्ली की गवर्निंग बॉडी की संस्तुति पर केंद्रीय आयुष मंत्री स्वतंत्र प्रभार भारत सरकार प्रतापराव जाधव ने आयुष शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ठ कार्यों हेतु उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ०) अरुण कुमार त्रिपाठी को ” Fellow Of Rashtriya Ayurveda Vidyapeeth (FRAV)” उपाधि से गत दिवस विज्ञान भवन, नई दिल्ली में सम्मानित किया। ज्ञात हो डॉ० अरुण त्रिपाठी, ऋषिकुल राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, गुरुकुल राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य/अधीक्षक, निदेशक आयुर्वेद एवं युनानी सेवायें उत्तराखंड, कुलसचिव एवं तीसरी बार उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में आयुष शिक्षा के उन्नयन एवं विकास हेतु उत्कृष्ठ कार्य कर उत्तराखंड प्रदेश का गौरव बढ़ाया, जिसके लिए उनको विशेष रूप से सम्मानित किया गया। डॉ० अरुण त्रिपाठी को विशेष सम्मान से अलंकृत किए जाने पर उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव रामजी शरण शर्मा, परिसर निदेशक प्रोफेसर डी०सी० सिंह, प्रोफेसर विपिन पाण्डे, प्रोफेसर के०के० शर्मा, संकायध्यक्ष डॉ० पंकज शर्मा, संकायध्यक्ष खेलकूद एवं अन्य शिक्षणोत्तर गतिविधि प्रोफेसर (डॉ०) नरेश चौधरी, उपकुलसचिव संजीव पाण्डेय, परीक्षा नियंत्रक डॉ० ओ०पी० सिंह, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कर्मचारी संगठन से चंद्रमोहन पैन्युली, विवेक जोशी ने विशेष रूप से बधाई दी। कुलसचिव रामजी शरण शर्मा ने कहा कि प्रोफेसर (डॉ०) अरुण त्रिपाठी को उच्च सम्मान से सम्मानित होने पर संपूर्ण उत्तराखंड प्रदेश का आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग भी गौरवान्वित हुआ है। जिसको भविष्य में शीघ्रा अतिशीघ्र आयुष प्रदेश के रूप में संपूर्ण विश्व जानने को मजबूर होगा। क्योंकि उत्तराखंड प्रदेश में आयुष के लिए बहुत कुछ है, जिसमें प्रोफेसर (डॉ०) अरुण त्रिपाठी के नेतृत्व में काफी अनुसंधान भी किये जा रहे हैं जो नई पीढ़ी के लिए कारगार सिद्ध होंगे। प्रोफेसर (डॉ०) अरुण त्रिपाठी ने उच्च सम्मान प्राप्त करने पर कहा कि इस प्रकार के सम्मान से अलंकृत होने पर एक प्रेरित ऊर्जा प्राप्त होती है। जिससे सम्मानित व्यक्ति और अधिक मेहनत से उत्कृष्ठ कार्य करने के लिए अग्रणी रहता है, तथा अन्य व्यक्तियों को भी आयुष शिक्षा में आगे बढ़कर नए अनुसंधान कर समाज की सेवा करने के लिए प्रेरणा मिलती है।

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