मनोविज्ञान शोध को बढ़ावा देने के लिए देसंविवि-एनएपीएस के बीच समझौता

मानसिक स्वास्थ्य और व्यसन अध्ययन पर संयुक्त अनुसंधान व कार्यक्रम होंगे

देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज और नेशनल एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजिकल साइंस (एनएपीएस) के बीच मनोविज्ञान, व्यसन अध्ययन और मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में शोध एवं अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते को उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे देश में मनोवैज्ञानिक शोध को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति चिन्मय पण्ड्या तथा एनएपीएस के अध्यक्ष रोशन लाल दहिया ने इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए इसे ज्ञान, अनुसंधान और सामाजिक उपयोगिता से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया।

एमओयू के तहत दोनों संस्थान पारस्परिक रुचि के विषयों पर सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित करेंगे और संयुक्त शोध प्रकाशनों को प्रोत्साहित करेंगे। इसके साथ ही शैक्षणिक पहल के तहत सेमिनार, सम्मेलन, कार्यशालाएँ, संगोष्ठियाँ और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर व्यापक संवाद स्थापित किया जा सके।

समझौते में संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित करने की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान अनुदानों के लिए संयुक्त प्रस्ताव विकसित किए जाएंगे। दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक और प्रशासनिक विशेषज्ञता का आदान-प्रदान भी किया जाएगा, जिससे शोध और शिक्षण की गुणवत्ता को और सुदृढ़ बनाया जा सके।

इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य मनोविज्ञान, व्यसन अध्ययन तथा मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है। इसके माध्यम से शोधकर्ताओं और छात्रों को बेहतर शोध अवसर उपलब्ध होंगे तथा नई ज्ञान परंपराओं का विकास होगा, जिससे समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समझ को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह समझौता अंतर्विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक विज्ञान की गहन समझ समाज के समग्र कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक है और इस तरह की साझेदारी से शोध, शिक्षा और सामाजिक विकास के नए आयाम खुलेंगे।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय और एनएपीएस के बीच यह सहयोग भविष्य में कई महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं और अकादमिक पहलों का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और समाज को व्यापक लाभ प्राप्त होगा।

  • Related Posts

    चारधाम यात्रा को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारी तेज, यात्रा मार्ग की चिकित्सा व्यवस्थाओं की समीक्षा

    सीएमओ ने दिए निर्देश, माह के अंत तक सभी स्वास्थ्य इकाइयों को किया जाए चाक-चौबंद आगामी 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा 2026 को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने…

    पिरान कलियर नगर पंचायत में स्वच्छता की गूँज; बच्चों को बांटी पेंटिंग किट, ‘स्वच्छ भारत मिशन 2.0’ के तहत जगाई अलख

    नगर पंचायत पिरान कलियर में मंगलवार को स्वच्छ भारत मिशन (शहरी 2.0) के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें आईईसी गतिविधियों के जरिए स्वच्छता का संदेश दिया…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *