लधियाघाटी के दूरस्थ गांवों में सामुदायिक सहभागिता के साथ वनों के संरक्षण का दिया गया संकल्प

लधियाघाटी के दूरस्थ क्षेत्रों के गांवों में सामुदायिक जन सहभागिता एवं जन जागरण अभियान के तहत गीत-संगीत और लोक नृत्यों के माध्यम से ग्रामीणों को वनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वन हमारी प्रकृति और संस्कृति के ऐसे महत्वपूर्ण परिचायक हैं, जिन पर पूरे प्राकृतिक तंत्र का संतुलन टिका है।

वक्ताओं ने बताया कि वन हमें शुद्ध हवा और निर्मल पानी तो देते ही हैं, लेकिन बदले में हमसे कुछ नहीं मांगते। आज बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के बीच यह जरूरी हो गया है कि प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए सजग होकर कार्य करे। यदि हमने अपने आसपास के जंगलों को सुरक्षित नहीं रखा तो आने वाले समय में शुद्ध हवा और पानी के लिए हमें संघर्ष करना पड़ेगा, और इसके लिए कोई दूसरा आगे नहीं आएगा।

इस अवसर पर ग्राम प्रधान अनीता देवी की अध्यक्षता में मां मंगलेश्वर लोक सांस्कृतिक दल, के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रेरणादायक गीतों व लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज को वनों के संरक्षण और पर्यावरण बचाने का मजबूत संदेश दिया, जिसे ग्रामीणों ने सराहा और अमल करने का संकल्प लिया।

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