नगर निगम की जिस 33 बीघा ज़मीन का लैंड यूज़ बदला गया, वो पहले खेती के काम की थी। एसडीएम अजय वीर सिंह ने इसे खेती से बदलकर बिज़नेस के लिए मंज़ूरी दी थी, 143 की अनुमति भी दी गई थी। लेकिन उस आदेश में साफ-साफ लिखा था कि ये ज़मीन सिर्फ बिज़नेस के लिए ही इस्तेमाल हो सकती है, कोई और काम हुआ तो ये मंज़ूरी रद्द मानी जाएगी।
अब जितेंद्र सुमन और एक तीसरे शख्स ने इस ज़मीन को “बिज़नेस” के नाम पर 143 करवा लिया और फिर नगर निगम को बेच दी। मगर अब हालत ये है कि वहां कोई बिज़नेस नहीं चल रहा, बल्कि नगर निगम ने वहां कूड़ा डालना शुरू कर दिया है।
यानी जो ज़मीन बिज़नेस के लिए ली गई थी, वो अब सिर्फ कूड़ा डालने के काम आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सिर्फ कूड़ा डालने के लिए ही लैंड यूज़ बदला गया था? और अगर ऐसा है, तो करोड़ों रुपये सरकार के यूं ही बर्बाद कर दिए गए।






