स्वामी विवेकानंद जयंती

स्वामी विवेकानंद जब तक नरेंद्र थे बहुत ही तार्किक थे, नास्तिक थे, मूर्तिभंजक थे। रामकृष्ण परमहंस ने उनसे कहा भी था कि कब तक बुद्धिमान बनकर रहोगे। इस बुद्धि को गिरा दो। समर्पण भाव में आओ तभी सत्य का साक्षात्कार हो सकेगा अन्यथा नहीं। तर्क से सत्य को नहीं जाना जा सकता। विवेक को जागृत करो।

विवेकानंद को रामकृष्ण परमहंस की बातें जम गई। बस तभी से वे विवेकानंद हो गए। फिर उन्होंने कभी अपनी नहीं चलाई। रामकृष्ण परमहंस की ही चली।

  • Related Posts

    सितारगंज उप जिला चिकित्सालय में ऑनलाइन ओपीडी ठप

    सितारगंज उप जिला चिकित्सालय में ऑनलाइन ओपीडी की व्यवस्था ठप हो गई। अस्पताल में अब ऑफलाइन पर्चियों के सहारे ओपीडी संचालित हो रही है। अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज…

    UPSC 2025: 708वीं रैंक पर ‘फैरुज फातिमा’ को लेकर भ्रम, कलियर और केरल की दो युवतियों ने किया चयन का दावा

    संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम में 708वीं रैंक को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। ‘फैरुज फातिमा’ नाम से दो युवतियों ने…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *