पूर्णागिरि मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, गंगा दशहरा पर रिकॉर्ड भीड़ से गूंजे शारदा घाट

श्रद्धालुओं की लंबी कतारें, मुंडन संस्कार के लिए दूर-दूर से पहुंचे परिवार; जल पुलिस की मुस्तैदी बनी जीवन रक्षक।

पूर्णागिरी मेले में गंगा दशहरा के अवसर पर सोमवार से श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने शारदा नदी में पवित्र स्नान कर मां पूर्णागिरी धाम के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे मेला क्षेत्र में आस्था, भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

पूर्णागिरि धाम में छोटे बच्चों के मुंडन संस्कार की विशेष मान्यता होने के कारण बड़ी संख्या में परिवार यहां पहुंचे। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार संपन्न कराया। मंदिर परिसर और शारदा घाट दिनभर श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे।

मैदानी क्षेत्रों में पड़ रही भीषण गर्मी का असर भी मेले में साफ दिखाई दे रहा है। श्रद्धालु एक ओर जहां मां पूर्णागिरि के दर्शन कर आस्था व्यक्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पहाड़ के सुहावने मौसम का आनंद भी उठा रहे हैं। खड़ी गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ जमा रही।

शारदा घाट में लगातार हो रही डूबने की घटनाओं के बीच जल पुलिस की मुस्तैदी और सतर्कता तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। ड्यूटी पर तैनात जवान पूरी तत्परता के साथ घाटों पर निगरानी कर रहे हैं और कई डूबते बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल चुके हैं। मेला मजिस्ट्रेट डॉ. ललित तिवारी ने जल पुलिस की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि जवान लगातार उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

मेले में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए लंगर सेवा भी लगातार संचालित की जा रही है। दूर-दूर से आए यात्री प्रसाद और भोजन सेवा का लाभ उठा रहे हैं। मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पूर्णागिरि मेले को वर्षभर आयोजित किए जाने की घोषणा के बाद विभिन्न विभागों द्वारा यहां स्थायी व्यवस्थाओं और परिसंपत्तियों के निर्माण कार्य तेज कर दिए गए हैं। प्रशासन अब मेले को स्थायी धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। मेला प्रशासन द्वारा तीर्थयात्रियों से सुझाव भी आमंत्रित किए जा रहे हैं, ताकि वर्षभर यात्रा संचालन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा सके।

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